शासन का आदेश दरकिनार? ट्रांसफर के बाद भी बिलासपुर में अटैच कर्मचारी।
आदिम जाति विकास विभाग में संलग्नीकरण पर सवाल: सितंबर 2025 में हुआ ट्रांसफर, काम की अधिकता बताकर बिलासपुर में ही रखा।

बिलासपुर। राज्य सरकार की तबादला नीति के तहत सरकारी विभागों में लंबे समय से चल रहे संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश हैं। इसके बावजूद आदिम जाति विकास विभाग के बिलासपुर कार्यालय में एक कर्मचारी के संलग्नीकरण का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि कर्मचारी का तबादला मुंगेली किया गया था, लेकिन आदेश जारी होने के महज 11 दिन बाद उसे बिलासपुर कार्यालय में ही अस्थायी रूप से काम करने का आदेश दे दिया गया।

मामला कनिष्ठ लेखा अधिकारी शिव नारायण यादव से जुड़ा है। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त द्वारा 15 सितंबर 2025 को जारी स्थानांतरण आदेश में यादव का तबादला कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, जिला मुंगेली किया गया था। स्थानांतरण सूची में कुल 10 कर्मचारियों के नाम शामिल थे।
ट्रांसफर के बाद जॉइनिंग की जगह मिला अटैचमेंट आदेश
तबादला आदेश के 11 दिन बाद 26 सितंबर 2025 को सचिव, आदिम जाति विकास विभाग की ओर से एक अन्य आदेश जारी किया गया। इसमें शिव नारायण यादव को मुंगेली में पदभार ग्रहण कराने के बजाय बिलासपुर कार्यालय में ही अस्थायी रूप से कार्य करने के निर्देश दिए गए।
आदेश में बिलासपुर कार्यालय में कार्य की अधिकता का हवाला देते हुए उन्हें आगामी आदेश तक बिलासपुर में कार्य संपादन के लिए कहा गया। यानी स्थानांतरण मुंगेली का हुआ, लेकिन कर्मचारी की सेवाएं बिलासपुर कार्यालय में ही जारी रहीं।
सरकार ने संलग्नीकरण खत्म करने के दिए थे निर्देश
इधर सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य के सभी विभाग प्रमुखों को पत्र जारी कर संलग्नीकरण की व्यवस्था समाप्त करने के निर्देश दिए थे। निर्देशों में स्पष्ट किया गया था कि यदि किसी कर्मचारी को किसी अन्य कार्यालय में संलग्न किया गया है तो उसे तत्काल रिलीव कर मूल पदस्थापना वाले कार्यालय में भेजा जाए।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शासन स्तर से संलग्नीकरण समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं, तो आदिम जाति विकास विभाग में यह व्यवस्था किस आधार पर जारी है?
आठ महीने से अधिक समय से बिलासपुर में ही कार्य
तबादला आदेश सितंबर 2025 में जारी हुआ था। इसके बाद भी संबंधित कर्मचारी को बिलासपुर कार्यालय में ही काम करने की अनुमति दी गई। अब यह मामला विभागीय कार्यप्रणाली और शासन के आदेशों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिलासपुर कार्यालय में आखिर ऐसी कौन-सी कार्य की अधिकता है, जिसके लिए स्थानांतरित कर्मचारी को उसकी नई पदस्थापना पर भेजने के बजाय पुराने कार्यालय में ही रोके रखा गया?
शासन के आदेश और विभागीय व्यवस्था आमने-सामने
एक ओर सरकार संलग्नीकरण की व्यवस्था खत्म करने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय स्तर पर जारी आदेश में कर्मचारी को अस्थायी रूप से बिलासपुर में ही कार्य करने की अनुमति दी गई। ऐसे में यह मामला अब केवल एक कर्मचारी के अटैचमेंट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शासन के आदेशों के पालन पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
अब देखने वाली बात होगी कि विभाग इस संलग्नीकरण को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है और संबंधित कर्मचारी को उसकी मूल पदस्थापना मुंगेली भेजने के संबंध में क्या कार्रवाई की जाती है।
