रेत माफिया के आगे नतमस्तक खनिज विभाग? मौत बनकर दौड़ रहे ओवरलोड हाईवा, कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित!
बिलासपुर/बेलगहना। बेलगहना तहसील क्षेत्र के सोढा खुर्द घाट से अवैध रेत का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। आरोप है कि रात के अंधेरे में ओवरलोड हाईवा बेखौफ दौड़ रहे हैं और खनिज विभाग तमाशबीन बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि अब लोगों की जान जोखिम में पड़ने लगी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि हाईवा क्रमांक CH10 BR 6183 सोढा खुर्द घाट से अवैध रेत लेकर तखतपुर जा रही थी। ग्राम पंचायत रतखंडी के पास एक युवक वाहन की चपेट में आते-आते बाल-बाल बच गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि युवक समय पर नहीं संभलता तो एक और बड़ा हादसा हो सकता था। इसके बावजूद रातभर ओवरलोड हाईवा सड़कों पर दौड़ते रहे और कार्रवाई कहीं नजर नहीं आई।
ग्रामीणों का आरोप है कि समाचार प्रकाशित होने के बाद खनिज विभाग ने केवल एक स्थान पर डंप रेत पर पेनल्टी लगाकर खानापूर्ति कर दी, जबकि मुख्य सड़क किनारे डंप लगभग 50 ट्रिप रेत को हाथ तक नहीं लगाया गया। आरोप है कि इसी डंप से रात के समय प्रति हाईवा ₹13,000 में अवैध रूप से रेत बेची जा रही है और परिवहन का खेल बदस्तूर जारी है।
बताया जा रहा है कि संबंधित हाईवा चालक ने स्वीकार किया कि वह सोढा खुर्द से रेत लेकर तखतपुर जा रहा है। चालक के अनुसार उसे रॉयल्टी पर्ची नहीं दी गई और वह बिना रॉयल्टी के “लूज” रेत लेकर परिवहन कर रहा था। यदि यह दावा सही है, तो यह अवैध परिवहन की निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर खनिज विभाग की कार्रवाई केवल कागजों तक ही क्यों सीमित है? जब अवैध रेत खुलेआम बिक रही है, बिना रॉयल्टी के वाहन दौड़ रहे हैं और आम लोगों की जान खतरे में पड़ रही है, तब जिम्मेदार अधिकारी आखिर किसके संरक्षण में यह सब होने दे रहे हैं? क्या विभाग किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है या फिर अवैध रेत कारोबार पर उसकी चुप्पी ही सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है?
अब क्षेत्रवासियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर अवैध रेत कारोबार में शामिल लोगों और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है तो उनके विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
घटना के तत्काल बाद मौके से कोटा एसडीएम और खनिज विभाग के अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं की गई। इसके बाद मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराते हुए अवैध रेत परिवहन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई।
