अमाली में प्रस्तावित कोल वाशरी की जनसुनवाई में पक्ष-विपक्ष आमने-सामने, रोजगार और पर्यावरण बना मुख्य मुद्दा।

कोटा। अमाली क्षेत्र में विराज अर्थ फ्यूजन प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित कोल वाशरी परियोजना को लेकर आयोजित जनसुनवाई के दौरान समर्थन और विरोध के स्वर एक साथ सुनाई दिए। एक ओर स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण प्रदूषण, कृषि भूमि को नुकसान तथा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर आपत्ति जताई, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के युवाओं ने रोजगार और विकास की संभावनाओं को देखते हुए परियोजना के पक्ष में सहमति व्यक्त की।
जनसुनवाई के दौरान विरोध कर रहे स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने निजी भूमि पर जनसुनवाई आयोजित की और इसमें बाहरी लोगों को भी शामिल किया गया। उनका कहना था कि कोल वाशरी से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे खेती और आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
वहीं कंपनी प्रबंधन ने परियोजना के पक्ष में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्थापित होने वाले प्लांट में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और हरित विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रबंधन ने यह भी दावा किया कि परियोजना शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा मूलभूत सुविधाओं और स्थानीय विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रबंधन के दावों के बीच जनसुनवाई में उपस्थित कई स्थानीय युवाओं ने क्षेत्र के विकास और रोजगार की उम्मीद में कोल वाशरी के समर्थन में अपनी सहमति जताई।
इस दौरान नेता संदीप शुक्ला, आदित्य दीक्षित, प्रकाश जायसवाल, संतोष गुप्ता, कुलवंत सिंह, कान्हा गुप्ता, लक्की मिश्रा, देवेंद्र कश्यप, पिंटू मरकाम, दिलीप श्रीवास, देवेंद्र कौशिक, प्रशांत अग्रहरि और संतोष बघेल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए परियोजना का विरोध किया।
जनसुनवाई में दोनों पक्षों के बीच क्षेत्र के विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अलग-अलग मत देखने को मिले, जिससे यह मुद्दा स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
