तखतपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: “जांच रिपोर्ट गायब, लेकिन मरीजों को थमाया जा रहा भारी भरकम बिल”
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का आरोप, निजी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल।
तखतपुर में एक निजी अस्पताल को लेकर लोगों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। आरोप है कि अस्पताल में मरीजों की सही जांच रिपोर्ट तक उपलब्ध नहीं कराई जाती, लेकिन इलाज के नाम पर मोटा बिल जरूर थमा दिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है और अस्पताल प्रबंधन को केवल पैसों से मतलब है।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में न तो बेहतर इलाज की व्यवस्था है और न ही मूलभूत सुविधाएं। प्राइवेट वार्ड की हालत तक सरकारी अस्पतालों से बदतर बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मरीजों से भारी शुल्क किस बात का लिया जा रहा है?
“डिग्री और विशेषज्ञता की हो जांच”
स्थानीय नागरिकों ने संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों से मांग की है कि अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों की डिग्री और विशेषज्ञता की जांच कराई जाए। आरोप है कि कुछ डॉक्टर स्वयं को एमबीबीएस के साथ स्पेशलिस्ट बताकर इलाज कर रहे हैं, जबकि उनकी योग्यता का कोई सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
लोगों का कहना है कि यदि कोई डॉक्टर विशेषज्ञ होने का दावा करता है, तो उसका प्रमाणपत्र और पंजीयन रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए ताकि मरीजों को भ्रमित न किया जा सके।

गलत इलाज से आरक्षक की मौत का आरोप
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब हाल ही में बिलासपुर जिले में एक आरक्षक की मौत को लेकर भी सवाल उठने लगे। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि गलत इलाज और लापरवाही के कारण आरक्षक की जान चली गई। अब लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक ऐसे अस्पतालों का “गोरखधंधा” चलता रहेगा?
शासन-प्रशासन पर भी उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल की सुविधाओं, डॉक्टरों की योग्यता, इलाज की प्रक्रिया और बिलिंग सिस्टम की निष्पक्ष जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आगे भी मरीजों की जान खतरे में पड़ती रहेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है
क्या शासन-प्रशासन इस अस्पताल की जांच करेगा या फिर मरीजों की जिंदगी के साथ यूं ही खिलवाड़ चलता रहेगा?

