कोटा । शहर में पहली बार आयोजित कोटेश्वर महादेव मंदिर के कोटेश्वर महा उत्सव पर अब सवालों की बौछार होने लगी है। भव्य आयोजन के दावों के बीच जमीनी हकीकत अव्यवस्था, ट्रैफिक जाम और प्रशासनिक सुस्ती की कहानी बयान कर रही है।
मेला स्थल तक पहुंचने वाले प्रमुख मार्गों पर रविवार को घंटों लंबा जाम लगा रहा। दोपहिया और चारपहिया वाहनों की कतारें दूर तक दिखाई दीं। श्रद्धालुओं को मेला पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
टेंडर हुआ, व्यवस्था क्यों नहीं?
मोटरसाइकिल स्टैंड का टेंडर जारी होने के बावजूद पार्किंग व्यवस्था नाकाफी नजर आई। ग्रामीण और नगरवासियों का कहना है कि जब पार्किंग का जिम्मा तय था तो फिर मैदान में अव्यवस्था क्यों रही? कई वाहन सड़क किनारे खड़े मिले, जिससे जाम की स्थिति और बिगड़ गई।
पुलिस प्रशासन पर सवाल
भीड़ प्रबंधन और ट्रैफिक नियंत्रण को लेकर पुलिस प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं था। डायवर्जन प्लान की स्पष्ट जानकारी भी लोगों तक नहीं पहुंच पाई।
राजनीति बनाम आस्था
मेला अपने पहले ही आयोजन में विवादों से घिर गया है। स्टैंड और मंच को लेकर चर्चाएं सुर्खियों में हैं। शहर में चर्चा है कि धार्मिक आयोजन के नाम पर कहीं राजनीतिक ताकत दिखाने की होड़ तो नहीं चल रही?
फिलहाल आमजन यही पूछ रहे हैं—
क्या यह महा उत्सव है या अव्यवस्था का प्रदर्शन?प्रशासन और आयोजकों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल व्यवस्था सुधारने का है, ताकि आस्था के इस आयोजन पर सवालों के बादल छंट सकें।

