बेलगहना में वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल: “एक ही मामले में बार-बार जेल भेजने” का SC/ST परिवारों ने लगाया आरोप।
बिलासपुर (बेलगहना)। बेलगहना वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 1051, खसरा क्रमांक 346/1 से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति (SC/ST) वर्ग के पीड़ित परिवारों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस मामले में वे पहले ही न्यायालय से दोषमुक्त हो चुके हैं, उसी प्रकरण में दोबारा कार्रवाई कर परिवार के सदस्यों को फिर से जेल भेजा गया है।

पीड़ित परिवारों के अनुसार, वे छत्तीसगढ़ राज्य के गठन से पहले से ही कोनचरा ग्राम से लगे वन क्षेत्र की नवतोड़ भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से खेती करने के बावजूद वन विभाग द्वारा उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। परिवारों ने अपने दावों के समर्थन में वन समिति के दस्तावेज, ग्राम पंचायत का प्रस्ताव तथा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं, जिनके आधार पर वे अपनी वैधता का दावा कर रहे हैं।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पीड़ितों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के एक बीट गार्ड सहित अन्य कर्मचारियों ने कार्रवाई के दौरान नाबालिग बच्ची और महिलाओं के सामने वीडियो बनाया तथा अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है और स्थानीय स्तर पर विरोध की स्थिति बनती नजर आ रही है।
पीड़ित परिवारों का यह भी कहना है कि जिस स्थान को वन विभाग “वन भूमि” बताकर कार्रवाई कर रहा है, वहां न तो कोई बड़े पेड़ मौजूद हैं और न ही पेड़ों के ठूंठ दिखाई देते हैं। इसके बावजूद “पशु-पक्षियों के आशियाना उजाड़ने” का प्रकरण दर्ज किया गया है, जिसे ग्रामीण पूरी तरह निराधार बता रहे हैं। उनका आरोप है कि झूठे तथ्यों के आधार पर उन्हें फंसाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि पूर्व में इसी अतिक्रमण प्रकरण में परिवार के कुछ सदस्य न्यायालय से दोषमुक्त हो चुके हैं। बावजूद इसके, उसी मामले में दोबारा गिरफ्तारी की कार्रवाई ने कई कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक ही मामले में बार-बार कार्रवाई करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग प्रतीत होता है।
ग्रामीणों एवं पीड़ित परिवारों ने संबंधित बीट गार्ड सहित अन्य वनकर्मियों पर झूठे आरोप गढ़कर फंसाने का आरोप लगाते हुए उनके तत्काल निलंबन की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो वे इस पूरे मामले की शिकायत जिला कलेक्टर, अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग तथा अन्य उच्च अधिकारियों से करेंगे।
इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वन विभाग की कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है या फिर वास्तव में कमजोर वर्गों के साथ उत्पीड़न हो रहा है। फिलहाल, पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं और प्रशासन की ओर से इस मामले में स्पष्ट प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

