आदिवासी बच्चों के नाम पर घोटाला! कुरदर बालक आश्रम में फर्जी हाजिरी का खेल, 20 दिन बाद भी प्रशासन खामोश।
*बिलासपुर।* आदिवासी बच्चों के नाम पर संचालित कुरदर आदिवासी बालक आश्रम में बड़े घोटाले की आशंका ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि आश्रम में छात्रों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर सरकारी राशन और राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों की शिकायत के करीब 20 दिन बाद भी आदिम जाति कल्याण विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
*50 की जगह 15–20 छात्र, रिकॉर्ड में पूरी हाजिरी*
ग्रामीणों के अनुसार आश्रम की क्षमता लगभग 50 छात्रों की है, लेकिन वास्तविकता में यहां केवल 15 से 20 बच्चे ही रह रहे हैं। इसके बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में पूरे 50 छात्रों की उपस्थिति दिखाकर शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इसी फर्जी उपस्थिति के आधार पर मिलने वाले राशन और अन्य सरकारी सुविधाओं में गड़बड़ी की जा रही है, जिससे शासन की राशि का दुरुपयोग होने की आशंका है।
*अधीक्षक गायब, चपरासी के भरोसे चल रहा आश्रम*
आश्रम की स्थिति इतनी लचर बताई जा रही है कि पिछले चार दिनों से हॉस्टल अधीक्षक प्रफुल्ल शर्मा मौके पर मौजूद नहीं हैं। बताया जा रहा है कि पूरा छात्रावास फिलहाल एक चपरासी के भरोसे संचालित हो रहा है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आदिवासी बच्चों की पढ़ाई, भोजन और सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसके हाथ में है।
*राशन व्यवस्था में भी संदिग्ध बदलाव*
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पहले जिस राशन दुकान से आश्रम को चावल की आपूर्ति होती थी, उसे बदलकर दूसरे पंचायत की दुकान से जोड़ दिया गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि इस बदलाव के पीछे निजी लाभ की मंशा हो सकती है।
इतना ही नहीं, जनवरी और फरवरी महीने का राशन भी नहीं उठाया गया, जिससे आश्रम में बच्चों के भोजन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
*25 छात्रों के नाम पर फर्जीवाड़े का आरोप*

ग्रामीणों का दावा है कि 50 छात्रों के नाम पर करीब 25 अतिरिक्त छात्रों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही है, ताकि शासन से मिलने वाली राशि का लाभ उठाया जा सके।
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने करीब 20 दिन पहले अधिकारियों को लिखित शिकायत भी सौंपी थी, लेकिन अब तक न तो कोई नोटिस जारी हुआ और न ही जांच शुरू हुई।
*शिकायत वापस लेने का दबाव*
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मामले को दबाने के लिए उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। वहीं यह भी आरोप लगाया गया है कि खबर प्रकाशित न करने के लिए पत्रकारों पर भी दबाव बनाने की कोशिश की गई।
*प्रशासन ने कहा – जांच होगी*
इस मामले में कोटा एसडीएम ने कहा कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है और मामले की जांच कराई जाएगी।
वहीं आदिम जाति कल्याण विभाग बिलासपुर के सहायक आयुक्त का कहना है कि शिकायत मिली है और जल्द ही जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
*सबसे बड़ा सवाल – कब होगी कार्रवाई?*
आदिवासी बच्चों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मामले में सामने आए आरोपों ने प्रशासन और आदिम जाति कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हैं या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

